Shadows in the dark

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shadows in the dark-crime story

Shadows in the dark – वारदातें… आए दिन हमारे आसपास होती रहती है| कभी हम अखबारों में पढ़ते हैं, कभी अपने पड़ोस में सुनते हैं| आज की कहानी भी एक असली वारदात पर आधारित है|

आज kahaniyaan आपके लिए मुंबई के पास लोनावला शहर में रहने वाली एक मलिक फैमिली के साथ हुई वारदात लेकर आई है | यह कहानी सच्ची घटना पर आधारित है| पात्रों के नाम बदल दिए गए हैं|

नेहा, एक 9 साल की लड़की, उसके परिवार में उसका 5 साल का भाई विवेक और उसके वालिद ,शेखर और सुमन मलिक है| मुंबई के पास लोनावला शहर की हसीन वादियों में रहने वाले मलिक परिवार , एक अप्पर मिडल क्लास के रईस लोग माने जाते हैं| ऐसे लोगों के घरों में हाउसहोल्ड हेल्प, बड़े बागीचे , स्विमिंग पूल्स, इलेक्ट्रिक गेट बहुत आम बात है|

नेहा और उसके परिवार को पालतू कुत्तों का बहुत शौक है| उनके पास 6 कुत्ते हैं जिनमें दो जर्मन shepards, दो Siberian Husk और 2 Rotweiler हैं | ज्यादातर ये खूंखार कुत्ते घर और लोन में खुले ही घूमते हैं |

एक upper middle क्लास फैमिली के लिए servants और gardners होना आम बात है| मलिक परिवार के पास भी एक servant विद्या और एक gardner रामपाल है|

नेहा और उसका भाई विवेक ड्राइंग रूम में बैठे अपना नया सेलफोन देख रहे थे| आप सोच रहे होंगे की यह बहुत चोटी उम्र है सेलफोंस के लिए, पर आजकल की डिजिटल इंडिया के जमाने में अपनी सांसों को नियंत्रण करने के लिए भी सेलफोंस की जरूरत पड़ती है| इन बच्चों को तो सिर्फ इमरजेंसी में करने के लिए सेल फोंस दिए थे|

मलिक साहब रात में वरांडाह का दरवाजा खुला नहीं छोड़ते थे, सुरक्षा कारणों की वजह से पर उस दिन बारिश के मौसम मैं ठंडी हवा का मजा लेने के लिए उन्होंने वरांडा का दरवाजा खुला छोड़ दिया था और पूरा घर मिट्टी की खुशबू से महकने लगा था| बारिश की वजह से कुत्तों को भी बागीचे के शेड में बांध रखा था|

रात के खाने के बाद तकरीबन 10 10:15 बजे बेडरूम में नेहा और उसका भाई अपने नए सेलफोन को सेट करने में लगे थे| हाउसमेड विद्या की बेटी बालिका भी उनके साथ बैठी थी| शेखर अपनी study मैं थे और सुमन बेडरूम में सोने की तैयारी कर रही थी| विद्या हेल्पर और रामपाल गार्डनर अपने अपने कमरों में जा चुके थे|

तभी बालिका ने कहा” कुत्तों को आज क्या हो गया है ? इतना क्यों भोंक रहे हैं? कितना शोर मचा रखा है| “

नेहा ने गौर किया, वो उठी और बाहर खिड़की में झांक कर देखा| कुछ अजीब लगा उसे भी| ज्यादातर हमेशा छोटे कुत्ते ही शोर मचाते थे, बड़े कुत्ते तो शांत ही रहते थे| अगर शोर मचाते भी थे तो सिर्फ कुछ देर तक, पर अभी तो सभी कुत्ते झुंड बनाकर लगातार भोंक hi जा रहे थे | कुछ तो अलग था |

नेहा ने अपने पापा को आवाज लगाई| शेखर ने भी आकर कहा” मैंने भी नोटिस किया है बेटा| मैं अभी देख कर आता हूं, सब ठीक है ना”|

उस वक्त ना  ही नेहा और ना ही शेखर के दिमाग में कुछ अनहोनी या संदेह खयाल आया होगा|

विवेक भी अपने पापा के के साथ चला गया कुत्तों को देखने| नेहा और बालिका पहले की तरह नए मोबाइल फोन में लग गई|

शेखर और विवेक ने गार्डन में जाकर देखा  के सारे कुत्ते एक जगह झुंड में खड़े हैं. एक दम तैनात, और स्विमिंग पूल के पीछे अंधेरे कोने की तरफ देख कर गुर्राह रहे हैं| गौर से देखने पर शेखर और विवेक को कोई नजर नहीं आया पर कुत्तों को देखकर लग रहा था किसी को देखकर गुर्राह रहे हैं.  उस कोने में लैंप जला करता था, विवेक के शक की सुई घूमी जब वहां के लैम्प बंद देखें|  विवेक ने अपने पापा शेखर से पूछा” पापा, वहां  का लैम्प खराब हो गया है क्या?

 “नहीं तो बेटा अभी 1 घंटे पहले ही तो मैंने देखा था चलते हुए”.”- शेखर ने जवाब दिया।

 Shadows in the dark crime story- अचानक कुछ दिमाग में आया और उनके रोंगटे खड़े हो गए।   विवेक कुत्तों के पास गया, और शांत करने की कोशिश की  मगर वह तब भी शांत नहीं हो पाए और लगातार भोंकते ही जा रहे थे|  तभी शेखर को अंधेरे कोने में कुछ हलचल महसूस हुई| उसने विवेक को अंदर भेजा टॉर्च लाने के लिए| फिर धीरे-धीरे शेखर ने अंधेरे कोने की तरफ चलना शुरू किया|  बारिश के मौसम की वजह से पेड़ तो हिल ही रहे थे पर फिर भी अपना वहम दूर करने के लिए आगे बढ़ दिया।   हर बढ़ते कदम के साथ उसका वहम डर में बदल रहा था|  शेखर ने स्विमिंग पूल को क्रॉस करके,  जैसे ही अंधेरे कोने की तरफ रुख किया तो सभी कुत्ते और ज्यादा चिड़चिड़े हो गए,  बेहद उतावले होकर अपने आप को छुड़ाने की कोशिश कर रहे थे ।

 शेखर ने वहां पहुंच कर देखा लैम्पस टूटे हुए हैं|  इससे पहले कुछ और सोच पाता,एक रिवाल्वर उसकी कंपट्टी पर तन गई  और अंधेरे से 4 लोग बाहर आए , पूरी तरह हथियार से ग्रस्त। एक के हाथ में चाकू,  दूसरे के हाथ में पिस्टल और बाकी दो  के हाथ में मोटी चेन लिपटी थी|  शेखर वही सुन खड़ा रहा|  निहत्था, पाँच चोरों ने उसे या घेर था । उसके पैर वही जम गए।  

कनपटी पर बंदूक रखे आदमी ने गुस्से में शेखर से पूछा”  दूसरा लड़का कहां है,  जो तुम्हारे साथ बाहर आया था?  कहां भेजा है उसे” |

शेखर के मुंह से निकल गया “वह पुलिस को फोन करने गया है”|  जैसे ही शेखर ने यह कहा,  सभी   चोरों मैं खलबली  मच गई|  किसी और ही भाषा में बात करने लगे|  शेखर ने ध्यान से सुनो तो वह भाषा पास के कूनऊ गांव की जुलू भाषा थी ।

 शेखर को अपने लोकल नौकरों और कार्यकर्ता  से बात करने के लिए यह भाषा थोड़ी थोड़ी आती थी| पर उन चोरों को तो यह नहीं पता था जो भी बात कर रहे हैं शेखर समझ पा रहा है|  

गुस्सैल चोर जिसने शेखर पर गन रखी थी जूलु भाषा में बोला” मारे गए,  पुलिस कभी भी आ सकती है। अब क्या करें?” 

उनमें से एक आदमी बोला”  मैंने तो पहले ही बोला था, थोड़ी और देर में जाते हैं|  सब सो जाते”|

 बीच में ही तीसरा आदमी बोल पड़ा ” एक काम करो,  इसे यही मार दो और जो मिले ले कर चलो”|

 एक छोटा लड़का बहुत ज्यादा गर्मी  खाते हुए बोला “मैं नहीं जाऊंगा फिर से जेल।   मुझे नहीं जाना । यहां से भाग निकलो इससे पहले पुलिस आ जाए।

 शेखर ने उस लड़के के डर का फायदा उठाया और कहा “पुलिस किसी भी मिनट आती होगी|  और यहां की पुलिस तो देखते ही गोली मार देती है”|  इस बात से छोटा लड़का और डर गया और सबसे लड़ने लगा “एक तो पहले ही कुत्तों ने भोंकभोंक   कर दिमाग खराब कर रखा है,जैसे सारे शहर को जगा देंगे|  उन से निपटने का रास्ता तो नजर नहीं आया पुलिस और आने को है|”

 शेखर को उन सब का प्लान चौपट होता नजर आया|  वह लड़का सब को समझा रहा था “अभी यहां से निकलते हैं, बाद में देख लेंगे|  अगर पकड़े गए तो  बुरे पहसेंगे । मैं तो जा रहा हूं, तुम लोग चलो ना चलो| नहीं तो मरोगे सब के सब|

 शेखर की कनपटी पर अब बंदूक नहीं की। वह गुस्सैल चोर भी अब  आपस की लड़ाई में शामिल हो चुका था।   शेखर ने मौका देखकर पीछे कदम लेने शुरूकिया। धीरे-धीरे करके वह उन चोरों से पीछे हटा,  एकदम मुड़ा और घर की तरफ जैसे ही भागना शुरू किया 3 चोरों ने उसे  देखकर शोर मचाया “ओए ओए… देखो देखो वह भाग रहा है|  उसमें हमें देख लिया है|  पकड़ो से|  उसे छोड़ नहीं सकते|”|  यह कहते ही तीन चोरों ने उसका पीछा करना शुरू किया|  बाकी दो चोर पीछे वही रूके,  निगरानी के लिए|

 Shadows in the dark – विवेक टॉर्च लेकर बाहर आ ही रहा था कि उसने  अपने पापा को  अपनी और भागते हुए देखा और फिर उसकी नजर गई पेच करते उन चोरों के तरफ। वो फौरन समझ गया कि क्या माजरा है|  दोनों ने varandaah क्रूस किया और अंदर आते ही जोर से ड्राइंग रूम का दरवाजा बंद कर दिया|  कुत्ते लगातार भोंक रहे थे मानो पूरे शहर को इस वारदात की खबर दे रहे हो|  विवेक और शेखर भागकर ऊपर बेडरूम में गए।   ” जल्दी करो,  5 लोग घुस गए हैं हमारीघर में | फोरण ऊपर के स्टोर्रूम में जो और चुप जाओ … जल्दी-जल्दी”

 नेहा, बालिका और सुमन  के  चेहरों का  रंग उड़ गया|  वह सब फौरन ऊपर भागे और स्टोर रूम में घुस गए।

 स्टोर रूम में घुसते ही उन सब ने अंदर से सभी एंट्री डोर्स और खिड़कियां बंद कर दी |  चोर नीचे घर में घुसने की कोशिश कर रहे थे। स्टोर रूम में घुसते ही शेखर को याद आया “विद्या और रामपाल तो अपने रूम में ही हैं|  उन्हें तो मालूम ही नहीं कि बाहर क्या हो रहा है| अगर उन्हें कुछ हो गया तो|

 शेखर के रोंगटे खड़े हो गए|  उसने बाकी सब से कहा “तुम सब यहीं रुको।   मैं नीचे जाकर विद्या और रामपाल को ऊपर लाता हूं| ”  नेहा ने बहुत मेहनत की”  पापा प्लीज मत जाओ,  आप को कुछ हो गया तो?  प्लीज पापा”|

 शेखर नहीं माना. 

 तब विवेक ने कहा”  मैं जरूर जाऊंगा आपके साथ|  आपको अकेले नहीं जाने दूंगा”|  उसने कोने में पड़ी रोड उठाई और शेखर को एक मोटा लकड़ी का डंडा पकड़ाया  और दोनों स्टोर्रूम से बाहर निकल गए| 

बाहर निकलते वक्त शेखर ने सुमन से कहा”  कोई भी आवाज आए,  कुछ भी हो जाए,  तुम लोग बाहर नहीं निकलोगे|  सिर्फ मेरी या विवेक की आवाज पर ही दरवाजा खोलना”।

 सुमन ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया और फौरन नेहा का फोन लेकर पुलिस को फोन  किया|  पुलिस ने कहा “आप लोग एक जगह चुप जाइए,  हम  जल्द से जल्द  पहुंचते हैं| “

 शेखर और विवेक  ने, धीरे-धीरे, पैरों के पंजों से सीढ़ियां उतरी|  शेखर आगे चल रहा था और विवेक पीछे|  अचानक किचन से कुछ गिरने की आवाज आई|  शेखर और विवेक को लगाकर चोर किचन में घुस गए हैं|  उसी दौरान बेडरूम से भी अलमारी तोड़ने की आवाज आती है|  बैडरूम का रास्ता  सीढ़ियों के उतरते ही बाएं और की तरफ था और किचन  दाएं और की तरफ थी|  सीढ़ियां उतरते ही पहले किचन आई|  शेखर ने धीरे से किचन में झांका तो उसे विद्या  नजरआ गई|  विद्या ने जैसे ही शेखर को देखा चौक गई,  बोली ” साब आप?? आप चोरों की तरह क्या क्यों घूम रहे हैं?”

  शेखर ने इशारा किया ” श श “|

 विवेक समझ गया,  विद्या किचन में है,तो बेडरूम में जरूर चोर होंगे| 

शेखर ने विद्या से कहा “यही विवेक के साथ खड़ी हो जाओ|  घर में चोर घुस आए हैं”|

 यह कहते ही वो भागा घर के पिछले हिस्से की तरफ जहां रामपाल का कमरा था| 

उधर विवेक विद्या को लेकर स्टोर रूम की तरफ चुपचाप भाग गया। उसने सोचा”  पापा रामपाल को लेकर आ ही जाएंगे” |

 जैसे ही शेखर रामपाल के साथ  उसके कमरे से बाहर  निकलने लगा,  उसने देखा चोर बेडरूम से बाहर निकालकर रसोई की ओर आ रहे हैं|  शेखर ने रामपाल को वापिस अंदर धकेला और सर्वेंट रूम का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया| बाहर से तोड़फोड़ की आवाज आ रही थी|

उधर विवेक विद्या को लेकर स्टोररूम पहुंच गया और वह सब अंदर चुपचाप छुप गए।

इतने में पुलिस की सायरन की आवाज आती है|  सभी के जान में जान आ गई|

 बाहर बागीचे में खड़े चोर तुम दबा कर भागे|  अंदर के 3 चोर भी रामपाल के कमरे के आगे से होते हुए,  घर के पिछले रास्ते से फौरन रफूचक्कर हो गए|  शेखर और रामपाल दोनों ने कमरे के आगे से उनके भागने की आवाज सुनी|  शेखर कमरे से बाहर आया और भाग के ऊपर स्टोर रूम  से सब को बाहर निकाला|  जब सब लोग नीचे आए तब तक पुलिस भी घर में आ चुकी थी|

सारी वारदात सुनने के बाद, पुलिस गार्डन के उस जगह पर गई, जहां सब चोर सबसे पहले शेखर से बड़े थे।   वहां जाकर उन्होंने देखा 5 नहीं,  सात चोरों के पैरों के निशान थे।   सभी 7 चोरों का गिरोह गार्डन की दीवार फांद कर अंदर आया था|  इस वारदात के बाद मलिक परिवार में अपने घर में बिजली के देवारें और security alams  लगवाए। कुत्तों को भी खोल गया और खूब से सहलाया गया|  वह सब भी अपने मालिक को सही सलामत देख कर खुश थे|

हादसा होते देर नहीं लगती|  हमारे साथ जो लोग रहते हैं चाहे वह हमारे घर वाले हो या हाउस हेल्पर्स, सब की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है|  शेखर मलिक चाहते तो वापस नीचे सर्वेंट के लिए ना  भी आते,  पर फिर भी उन्होंने इंसानियत का साथ दिया और किस्मत ने उनका।

हमारी इस कहानी को आप podcast पर भी सुन सकते हैं। हमारा podcast सभी उच्चतम audio मंच पर उपलब्ध है।

हमारे podcast का नाम है – kuch toh baat hai

Narration – kanika bansal

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